मर्ज-ए-इश्क़

वक़्त के पहियों में पावं डालकर घिसटा था मैं बहुत देर तक इसके साथ घूमने से पहले। तब मेरी कराह का मज़ाक उड़ाया था तुमने। मैं रुका था, इतना रुका था, कि समय भी चिढ़ गया था मुझसे। कहता था, ऐसे खंरोंचों से तुम्हें क्या मिलेगा। रोज एक ही ज़ख्म छीलते हो, देखता हूँ और … Read more

लहू का गुलाब

ज़हन में अंधेरा, बाहर चाँदनी, बदन में आग है।परवाना अंधा, समां रोशन, लहू का गुलाब है।। जो धंसा यूँ नस्तर उनके निगाहों का दिल पर।वो समझते कि जैसे बस उनका ही रुबाब है।। बेअदब धड़कन, लाइलाज़ उलझन, सर्द रात है।जुगनू चम-चम, बेख्याल मन, सवाल-ए-हयात है।। अलसायी पाजेब की छन-छन उकसाती है मन को।गुनाह मेरा भी … Read more

प्रकृति से विद्रोह

सिगनलों की कतार में, गाड़ियों की चीत्कार में।काँपती है छाती तेरी, मनुष्य निर्मित संसार में।। धुंध सी सोती सुबह में, धुंए में लिपटी शाम में।सच बता क्या इतना मजा है, हार के इस जाम में।। प्राणवायु के अभाव में, गटर में बहती नाव में।सड़क पे पड़े कूड़े में, आदम के टूटे खिलौने में।। अभिमान के … Read more

वतन में फूल तो खिलने जरूरी है।

तू हिन्दू बन हम मुसलमान बन जाते है।बहाने इश्क़ के थोड़े इन्शान बन जाते है।।करते है कबूल कुदरत की दौलत ।धर्म और मजहब से अनजान बन जाते है।। या राख हो या मिट्टी में मिल जाते है।जब तक सांस है कैसे शमशान बन जाते है।।खुदा खैर दे खामोश जिंदा बेज़ुबानों को।कैसे उबलती नसों पे कब्रिस्तान … Read more

अर्धसत्य

आज सफाई की कमरे की और फिर वही पुराने उहापोह में दिल और दिमाग बेचैन है। फिर से वही चीज़े सामने रखी है जो किसी इस्तेमाल की नहीं या कहे तो शायद बिता वक़्त जो छाप छोड़ कर गया है उन पर, उसकी इज़ाजत नहीं देता। ये पहली बार नहीं है पता नहीं कितनी बार … Read more

बिसात

मयस्सर चाँद न होता है अब,कलिखनुमा रात हो गया है , दौलत की ज़ुफ्त्जो में इशरत ,दुनिया एक बिसात हो गया है , दिन ईमान की बातो में क्या रखा है ,खुसामद’इ साहब ही नमाज हो गया है , दहसत से लबरेज बस्तियां फैली है हर ओर…कफ़न अब रंग बिरंगा लिबास हो गया है , … Read more