मयस्सर चाँद न होता है अब,कलिखनुमा रात हो गया है , दौलत की ज़ुफ्त्जो में इशरत ,दुनिया एक बिसात हो गया है , दिन ईमान की बातो में क्या रखा है ,खुसामद’इ साहब ही नमाज हो गया है , दहसत से लबरेज बस्तियां फैली है हर ओर…कफ़न अब रंग बिरंगा लिबास हो गया है , … Read more