मर्ज-ए-इश्क़

वक़्त के पहियों में पावं डालकर घिसटा था मैं बहुत देर तक इसके साथ घूमने से पहले। तब मेरी कराह का मज़ाक उड़ाया था तुमने। मैं रुका था, इतना रुका था, कि समय भी चिढ़ गया था मुझसे। कहता था, ऐसे खंरोंचों से तुम्हें क्या मिलेगा। रोज एक ही ज़ख्म छीलते हो, देखता हूँ और … Read more

लहू का गुलाब

ज़हन में अंधेरा, बाहर चाँदनी, बदन में आग है।परवाना अंधा, समां रोशन, लहू का गुलाब है।। जो धंसा यूँ नस्तर उनके निगाहों का दिल पर।वो समझते कि जैसे बस उनका ही रुबाब है।। बेअदब धड़कन, लाइलाज़ उलझन, सर्द रात है।जुगनू चम-चम, बेख्याल मन, सवाल-ए-हयात है।। अलसायी पाजेब की छन-छन उकसाती है मन को।गुनाह मेरा भी … Read more