जब घड़ी नही थी तब लोग आती-जाती मौसमों से समय का हिसाब रखते थे। समयांतराल बड़ा हुआ करता था। लोग सालो, महीनों और हफ़्तों की अवधि में बात किया करते थे। अक्सर सुना है बूढ़े-बुज़ुर्गो को कहते हुए की उम्र के फलाना बसंत में फलाना चीजे हुई। रोज़मर्रा की जरूरतें पूरी करते-करते हम मौसम का … Read more