आज सफाई की कमरे की और फिर वही पुराने उहापोह में दिल और दिमाग बेचैन है। फिर से वही चीज़े सामने रखी है जो किसी इस्तेमाल की नहीं या कहे तो शायद बिता वक़्त जो छाप छोड़ कर गया है उन पर, उसकी इज़ाजत नहीं देता। ये पहली बार नहीं है पता नहीं कितनी बार … Read more