सच बता की क्या ख्वाबों में कभी…
कुछ उधरे ख़्याल बुन रहा हूँ।बड़ी भीड़ है यहां,अब ख़ामोशी चुन रहा हूँ।मेरे जज़्बात अक्सर टोक देते है।हूँ अकेले बैठा क्यूँ,और किसको सुन रहा हूँ। माहौल।आजकल जब शाम तेरा पता पूछती है तो कह देता हूँ बाजार गयी है अभी आ जायेगी। जब तक वो आती है तब तक मेरे साथ ही बैठ जाओ। पहले … Read more