संडे मार्केट। अहमदाबाद

दुकानें सज रही है लोग बिक रहे है। घर खाली है दुनिया आजकल बाज़ार में रहा करती है। कुछ बेच देने की, कुछ हासिल करने की, ज़रूरत है ऐसा तो लगता नहीं। फिर इन आँखों में भूख कहां से आती है। लगता है सब यादें बुनने का कारोबार है। सही भी है… आखिर यही तो … Read more

तन्हाई ! 

अब पता होता है कि ये रात लंबी तो हो सकती है लेकिन हमेशा के लिए नहीं है। अब वैसी बेचैनी नहीं होती है। उतनी घुटन नहीं होती। आदत हो गयी है नहीं कह सकता लेकिन प्रतिकार का कोई फायदा नहीं तो इस आराम को मेरी मूक सहमति समझा जाये। बेवफाई का जायका ज़रा फीका … Read more