लॉक डाउन।

कभी सोचा है की क्या सोचते है आप ? गमछे, लूँगी, गंजी के कोने से ऐनक साफ करते समय शून्य में ताकते हुए… एक टाँग पर टाँग बदल-बदलकर खड़े होते हुए चुल्हे पर रखे दूध के उबाल पर नज़र टिकाए… नेल कटर से उछले हुए नाखूनों को पैर से मेज़ के नीचे से घसीट का … Read more

क्या बेजुबाँ इश्क़ नहीं करते ? 

हर बात कह दी जाए लिखकर बता दी जाए  हमेशा तुम्हें मेरी खबर होमुझे तुम्हारा पता हो ज़रूरी तो नहीं कभी तुम चुप रह जाया करोकभी मैं ख़ामोश रह जाऊंगा क्या बेजुबाँ इश्क़ नहीं करते ? 

डर लगता है

अकेले बहुत दिन हो गए डर लगता हैतन्हाई बिछड़ा हुआ हमसफर लगता है। मुझे तेरी कमी इतनी भी नहीं खलतीबस भीतर से यह शक़्स बेघर लगता है। आते जाते लोग हाल पूछ जाते हैशायद उनको यह बेखबर लगता है। अभी इतनी भी दूर नहीं निकला कीअंजान पुराना वो राहबर लगता है। एक पहर भी न … Read more

आसान तो नही होता।

जो आयी है लवों पर,तो कुछ तो वजह होगी। यूं बेमतलब मुस्कुराना,आसान तो नही होता।। ख़ुशी हो कोई गम हो,छलक कर तो आये। यूं कगार पे रह जाना,आसान तो नही होता। समा जलती बुझती,जैसे पलके हो झुकती, यूं सिमट के बिखर जाना,आसान तो नहीं होता।

आधी मुहब्बत का कुछ तो असर होता है

नादान इस तरह न देख मुझे।तुझे अंदाज़ा नही की क्या होता है।।रगों में उफनता है सैलाब लहू का।सारी रात न इंसान ये फिर सोता है।। कनखियों से वाण सीधे जिगर पर।कहर मासूमियत में गजब होता है।।रहे आशिकी एक तरफा ही सही।आधी मुहब्बत का कुछ तो असर होता है।।

प्रकृति से विद्रोह

सिगनलों की कतार में, गाड़ियों की चीत्कार में।काँपती है छाती तेरी, मनुष्य निर्मित संसार में।। धुंध सी सोती सुबह में, धुंए में लिपटी शाम में।सच बता क्या इतना मजा है, हार के इस जाम में।। प्राणवायु के अभाव में, गटर में बहती नाव में।सड़क पे पड़े कूड़े में, आदम के टूटे खिलौने में।। अभिमान के … Read more

बिसात

मयस्सर चाँद न होता है अब,कलिखनुमा रात हो गया है , दौलत की ज़ुफ्त्जो में इशरत ,दुनिया एक बिसात हो गया है , दिन ईमान की बातो में क्या रखा है ,खुसामद’इ साहब ही नमाज हो गया है , दहसत से लबरेज बस्तियां फैली है हर ओर…कफ़न अब रंग बिरंगा लिबास हो गया है , … Read more