मसलिन का मुखौटा

ज़हन में उठती चिंगारियों को हवा देती एक आवाज़ सोने नहीं दे रही आज। यूं सपनो में जाने कौन सी खोंच पड़ गयी है। हर बार नींद वही उसी मुकाम पे उचट जाती है। इस खामोशी में पंखे की कराह। मानो कोई हमदम बीमार पड़ा हो जिससे मैं उकता गयी हूँ। हरे रंग का जीरो … Read more

इयर बड्स…

गांधीनगर से अहमदाबाद के लिए बहुत कम रेलगाड़िया चलती है। वैसे मुझे तो मुंबई जाना था लेकिन गाँधीनगर से अहमदाबाद तक टैक्सी का किराया, अहमदाबाद से मुम्बई तक के रेल के किराये से भी ज्यादा उठ जाया करता था। इसलिए मैंने ये तरक़ीब खोज ली थी। गांधीनगर से शाम 6:15 की ट्रेन जो इंदौर तक … Read more

लॉक डाउन।

कभी सोचा है की क्या सोचते है आप ? गमछे, लूँगी, गंजी के कोने से ऐनक साफ करते समय शून्य में ताकते हुए… एक टाँग पर टाँग बदल-बदलकर खड़े होते हुए चुल्हे पर रखे दूध के उबाल पर नज़र टिकाए… नेल कटर से उछले हुए नाखूनों को पैर से मेज़ के नीचे से घसीट का … Read more

लिख के भूल जाना …

लिख के भूल जाना यही तो फितरत होती है।शायरी कब कहाँ किसी की इशरत होती है।। भूला दे, न देखे ज़माना, तुमको न समझे।दुनिया है, सबकी अपनी किस्मत होती है।। भूले सुबह के शाम हर बार नहीं लौटते।टूटे घुंघरूओं की अलग ही खनक होती है।। मिलना- जुलना तो लगा है चलता रहेगा।कहो बेवफ़ाई की भी कभी … Read more

संडे मार्केट। अहमदाबाद

दुकानें सज रही है लोग बिक रहे है। घर खाली है दुनिया आजकल बाज़ार में रहा करती है। कुछ बेच देने की, कुछ हासिल करने की, ज़रूरत है ऐसा तो लगता नहीं। फिर इन आँखों में भूख कहां से आती है। लगता है सब यादें बुनने का कारोबार है। सही भी है… आखिर यही तो … Read more

क्या बेजुबाँ इश्क़ नहीं करते ? 

हर बात कह दी जाए लिखकर बता दी जाए  हमेशा तुम्हें मेरी खबर होमुझे तुम्हारा पता हो ज़रूरी तो नहीं कभी तुम चुप रह जाया करोकभी मैं ख़ामोश रह जाऊंगा क्या बेजुबाँ इश्क़ नहीं करते ? 

डर लगता है

अकेले बहुत दिन हो गए डर लगता हैतन्हाई बिछड़ा हुआ हमसफर लगता है। मुझे तेरी कमी इतनी भी नहीं खलतीबस भीतर से यह शक़्स बेघर लगता है। आते जाते लोग हाल पूछ जाते हैशायद उनको यह बेखबर लगता है। अभी इतनी भी दूर नहीं निकला कीअंजान पुराना वो राहबर लगता है। एक पहर भी न … Read more

कबूतर चूतिये होते है।

मैं यहां स्टैंड उप कॉमेडी करने नही आया हूँ। कबूतरों को गाली देने आया हूँ। आपको बुरा लग रहा होगा। लेकिन मेरे दिल का दर्द नही पता आपको। ये साले झुंड बना के मेरी अकेले में लेते है। मैं इधर इन सब की पब्लिक में लूँगा। और सच्चाई यह है कि मेरे पास बदल लेने … Read more

तन्हाई ! 

अब पता होता है कि ये रात लंबी तो हो सकती है लेकिन हमेशा के लिए नहीं है। अब वैसी बेचैनी नहीं होती है। उतनी घुटन नहीं होती। आदत हो गयी है नहीं कह सकता लेकिन प्रतिकार का कोई फायदा नहीं तो इस आराम को मेरी मूक सहमति समझा जाये। बेवफाई का जायका ज़रा फीका … Read more

मैं पुरुष हूँ।

हाँ..मैं देखता हूँ तुम्हें। घूर-घूर देखता हूँ। तुम अच्छी लगती हो। तुम…सब अच्छी अच्छी लगती हो। जानता हूँ लोग अलग-अलग बातें करेंगे। न जाने क्या-क्या करार दिया जाएगा मुझे, पर सच में तुम सभी अच्छे लगते हो। तुम्हें देखने को मन करता है। तुम्हें जानने का मन करता है। तुम रमणीय हो। मेरी नज़र ख़राब … Read more