मसलिन का मुखौटा

ज़हन में उठती चिंगारियों को हवा देती एक आवाज़ सोने नहीं दे रही आज। यूं सपनो में जाने कौन सी खोंच पड़ गयी है। हर बार नींद वही उसी मुकाम पे उचट जाती है। इस खामोशी में पंखे की कराह। मानो कोई हमदम बीमार पड़ा हो जिससे मैं उकता गयी हूँ। हरे रंग का जीरो … Read more

रुमाल

बड़ी उसनती सी गर्मी है। बिजली जाते ही मानो संसार थम जाता है। ऐसी निःस्तब्धता निर्जीव में भी जान डाल देती है। सामान्यतः सूती कपड़े का एक चौकोर टुकड़ा। सादा, रंगीन, बेल-बूटेदार या सजीला किनारी वाला, विविध रुपों में सहजतापूर्वक हर जगह उपलब्ध। दाग-धब्बे समेटे हुए तो कभी सुगंधित इत्र की महक से गमकता हुआ। … Read more

पतंग

क्या स्वाधीनता की कोई कीमत होती है। पतंग की डोर किसी के हाथ में होनी चाहिए तभी वो ऊपर बनी रहती हैं । समाज इसे ही सच मानता है । और हमे पतंग। जो भी हो एक बदलाव तो साफ दिखाई देता है । अकसर मेरे इर्द-गिर्द का समाज मुझे अनवरत अहसास दिलाता रहता है … Read more