वतन में फूल तो खिलने जरूरी है।

तू हिन्दू बन हम मुसलमान बन जाते है।बहाने इश्क़ के थोड़े इन्शान बन जाते है।।करते है कबूल कुदरत की दौलत ।धर्म और मजहब से अनजान बन जाते है।। या राख हो या मिट्टी में मिल जाते है।जब तक सांस है कैसे शमशान बन जाते है।।खुदा खैर दे खामोश जिंदा बेज़ुबानों को।कैसे उबलती नसों पे कब्रिस्तान … Read more