लिख के भूल जाना …
लिख के भूल जाना यही तो फितरत होती है।शायरी कब कहाँ किसी की इशरत होती है।। भूला दे, न देखे ज़माना, तुमको न समझे।दुनिया है, सबकी अपनी किस्मत होती है।। भूले सुबह के शाम हर बार नहीं लौटते।टूटे घुंघरूओं की अलग ही खनक होती है।। मिलना- जुलना तो लगा है चलता रहेगा।कहो बेवफ़ाई की भी कभी … Read more