मैं पुरुष हूँ।

हाँ..मैं देखता हूँ तुम्हें। घूर-घूर देखता हूँ। तुम अच्छी लगती हो। तुम…सब अच्छी अच्छी लगती हो। जानता हूँ लोग अलग-अलग बातें करेंगे। न जाने क्या-क्या करार दिया जाएगा मुझे, पर सच में तुम सभी अच्छे लगते हो। तुम्हें देखने को मन करता है। तुम्हें जानने का मन करता है। तुम रमणीय हो। मेरी नज़र ख़राब … Read more

नारीत्व और नारीवाद 

बारहवीं क्लास में पहुंचने के पहले ही मेरी बहने, बढ़िया खाना बना लेती थी। रोटियां एकदम गोल, आप चाहे तो गोलंबर से नाप सकते थे। सिलाई, कढ़ाई, बुनाई के साथ क्रोसिया का काम भी उन्होंने खेल-खेल में सिद्धस्त कर लिया था। अपना सलवार सूट सिलने के साथ-साथ मम्मी की साड़ी में फाल लगाना, पापा और … Read more